Videshi chachi ki chudai

अब घर में मेरी शादी की बातें चलने लगी। वैसे तो मेरा कोई चक्कर नहीं था, हाँ पड़ोस के गाँव की एक लड़की से यारी थी मगर बस इतनी के जब भी मिलते बस चोदा चोदी के लिए ही मिलते थे। ऐसे में एक दिन पिताजी ने बताया के हमारे चाचाजी जो इंग्लैंड में बस

Tanu aur surbhi ki chudai

ये बात उन दिनों की है.. जब मैं कोटा में रह कर इंजीनियरिंग की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। कोटा में दशहरा का मेला बड़ा प्रसिद्ध है.. मैं भी एक दिन दोस्तों के साथ मेला घूमने गया। मैं नया-नया स्कूल से आया था और बाहर का माहौल देख कर मैं बहुत खुश था.. उस

Kam ke bhane aunty ki chudai

यह बात अभी एक महीना पहले की है.. हमारे पड़ोस में एक आन्टी रहती हैं.. मैं बचपन से ही उसका दीवाना था। क्योंकि वो दिखने में बहुत सुंदर थी। उसका कटीला फिगर.. चेहरा दिलकश.. कुल मिला कर वो बहुत ही खूबसूरत हैं। उसकी उमर अब 34 साल है.. फिर भी 27-28 की लगती हैं। मैं

Raste me mili aunty ki chudai

यह कहानी आज से कुछ महीने पहले की है.. बात कुछ ऐसी है कि मैं रोज़ जब भी घर से निकल कर अपने जॉब पर जाता हूँ.. तो मेरे घर के थोड़ा फासले पर एक स्कूल है.. वहीं से होकर मेरा रोज़ आना-जाना रहता है। जैसे ही में स्कूल के पास पहुँचता हूँ.. तो एक

Pirti ki chudai5

मैंने उसके साथ तुरंत स्थान बदल कर सम्भोग क्रिया को ज़ारी रखा और अगले दस मिनट के तीव्र संसर्ग के बाद हम दोनों ने एक साथ ही प्रीति की योनि में अपना रस स्खलित कर दिया। पांच मिनट वैसे ही लेटे रहने के बाद जब हम उठे तो देखा कि प्रीति की योनि में से

Priti ki chudai 4

जैसे ही प्रीति ने मेरे लिंग को अपनी योनि के होंठों में फसाया मैंने जोर से धक्का दे दिया और लिंग-मुंड को उसकी योनि के अंदर डाल दिया। प्रीति के मुँह से जोर की एक चीख निकली तथा सिर हिलाते हुए सिस्कारियाँ भरते हुए तड़पने लगी। मैं कुछ देर के लिए वहीँ रुक गया और

Pirti ki chudai3

अपने लिंग को शांत करने के लिए जब मैं हस्तमैथुन करके बाथरूम से बाहर निकला तब देखा की प्रीति बाथरूम के दरवाज़े के पास खड़ी मुस्करा रही थी। उसकी मुस्कराहट देख कर मैं समझ गया कि उसने मेरे द्वारा बाथरूम के अंदर करी गई हर क्रिया को देख लिया था। उसके बाद प्रीति ने धुले

Pirti ki chudai 2

मेरी बात सुन कर प्रीति अवाक सी मेरी ओर देखते हुए बोली- मैं यह नहीं करना चाहती हूँ लेकिन मेरी मजबूरी के कारण मुझे आपकी बात मानना पड़ रही है। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि मैं आपके इस उपकार को कैसे उतारूँगी। अनायास ही मेरे मुख से निकल गया- प्रीति, मेरी गैर

Pirti ki chudai1

छह वर्ष पहले जब मैं उन्नीस वर्ष का था तब मैंने भोपाल के ही एक इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था और पास ही की एक कॉलोनी में कमरा किराये पर ले कर रहने लगा था। दिन और रात के खाने के लिए कमरे से कुछ दूर ही एक ढाबे वाले से अनुबंध कर लिया